Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



मित्रता


डॉ.पूर्णिमा राय


 
नहीं जाने दूँगा
अब कहीं ओर!
यूँ ही पकड़के रखूँगा
हाथों में हाथ!
ओ मेरे चितचोर,
तुम ही तो लाते हो
सदैव बादल घनघोर!!
सुबह ,दोपहर और साँझ
तुम्हारे साथ ही खिलता
मेरे मन का मोर!!
गहन रहस्य 
प्रकृति का बता दूँ!
तेरी हरीतिमा से मैं 
आँचल भू का सजा लूँ!
ओढ़ लूँ तेरा सौंदर्य 
अपनी रग-रग में,
नैसगिर्क छटा 
से मन धवल बना लूँ!
कस कर जकड़ लेना
अपनी आगोश में,
कहीं मेरी कामुकता ,लोलुपता
भंग न करे तेरी शालीनता,
तेरे सौंदर्य को!
इससे पहले आ ज़रा 
निर्मलता और पवित्रता
के आलोक में
फैला दे अपने विस्तृत 
स्वरूप को !
नगण्य मनुज व उसकी तुच्छ सोच
एवं क्षणभंगुर जीवन का
पर्दाफाश करके
बता दे -----
चिरकाल तक अमर अजर है ----
पेड़ और उसकी मित्रता ,
मानवता से ,
मानवीय जाति से
और
इंसानियत से !!
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें