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वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



माहिया कविता


प्राण शर्मा


   
अद्भुत है वो प्यारे 
राम का नाम कभी 
तोते से सुन प्यारे 
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कुछ तो तम हरता है नन्हा सा जुगनू जगमग सा करता है
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क्यों उसको उड़ाता है कौआ प्रीतम का संदेशा लाता है
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उस पर बलिहारी है चिड़िया रानी तो हर मन को प्यारी है
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कुछ तो समझाता है सुबह सवेरे जब मुरगा जग जाता है
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क्या कहने कबूतर के चिट्ठी लाने में चरचे थे कबूतर के
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इंसान सी लोच नहीं कोई बतलाये किस जीव में सोच नहीं
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