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वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



चुप रहो


अमरेश सिंह भदोरिया


 
यदि सच कहना चाहते हो
तो आईने की तरह कहो,
वरना चुप रहो......!!!!!
1.
परंपरा परिपाटी का सच, हल्दी वाली घाटी का सच, कुरुक्षेत्र की माटी का सच, ........या......... सत्य-अहिंसा लाठी का सच, यदि इनमे से आपका सच मेल खाता है तो शौक़ से कहो, वरना चुप रहो,....!!!!!
2.
आँगन की दीवारों का सच, मंदिर या गुरुद्वारों का सच, मज़हब या मीनारों का सच, .........या......... खून सने अख़बारों का सच, यदि इनमे से आपका सच मेल खाता है तो शौक़ से कहो, वरना चुप रहो,....!!!!!
3.
भगत सिंह बलिदानी का सच, पन्ना की कुर्बानी का सच....., बादल-बिजली-पानी का सच, ..........या......... खेती और किसानी का सच, यदि इनमे से आपका सच मेल खाता है तो शौक़ से कहो, वरना चुप रहो,...!!!!!
4.
माँ के व्रत-उपवास का सच, उर्मिला के अहसास का सच, वैदेही वनवास का सच, ........या........ शबरी के विश्वास का सच, यदि इनमे से आपका सच मेल खाता है तो शौक़ से कहो, वरना चुप रहो,!!!!!
5.
सत्तासीन दलालों का सच, पंचायत - चौपालों का सच, मुफ़लिस-भूँख-निवालों का सच, .........या......... अनसुलझे सवालों का सच, यदि इनमे से आपका सच मेल खाता है तो शौक़ से कहो, वरना चुप रहो , !!!!!
6.
क़ातिल बाज़ निगाहों का सच, करूण सिसकियां आहों का सच, ख़बरों या अफवाहों का सच,.... .........या.......... भीड़-भरे चौहारों का सच,..... यदि इनमे से आपका सच मेल खाता है तो शौक़ से कहो, वरना चुप रहो।!!!!!
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