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वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



बंध के बह


-डाॅ. कौशल किशोर श्रीवास्तव


 
जो कहना हो मन में कह,
मैं मुझमें तू तुझमें रह।

नदिया से बोला साहिल,
बहना हो तो बंध के बह।

हिम्मत हो तो फिर भिड़ जा,
ढ़हना हो तो कह के ढह।

मेरा उससे क्या झगड़ा,
ताकतवर है मुझसे वह।

लड़ना हो तो मिल के लड़,
सहना हो तो मिल के सह।
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