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वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



आम और केले की लड़ाई


डॉ० अनिल चड्डा


 
एक बार की बात है बच्चो,
आम और केले में थी ठन गई,
केला बोले मैं हूँ मीठा,
आम कहे मैं तुझसे मीठा ।
 
यूँ ही दोनों में तब बच्चो,
बढ़ते-बढ़ते बहस थी बढ़ गई,
कौन है दोनों में से मीठा,
बात यहाँ पर आ कर अड़ गई ।
 
केला बोला चल हट झूटा,
कभी-कभी तू होता  खट्टा,
मेरे स्वाद पे लेकिन देखो,
लगता नहीं कभी है बट्टा ।
 
आमजी ने पर घुड़की लगाई,
बोला मैं हूँ फलों का राजा,
जब मेरा मौसम है आता,
सब कहते हैं आम को खाजा ।
 
स्वाद बेशक मेरा खट्टा हो,
फिर भी मिलता अलग जायका,
स्वाद तेरा  हो हरदम इक सा,
कभी-कभी तो हो तू फीका ।
 
आम सिर्फ गर्मी में आये,
केला हर मौसम में खायें,
तू तो बस है स्वाद का राजा,
मुझसे लोग फायदे भी पायें ।
 
हुआ नहीं जब कोई फैसला,
बंदरजी इक कूदे आये,
बोले मैं हूँ बड़ा अक्लमंद,
कई फैसले मैंने कराये ।
 
दोनों को तब याद थी आई,
बिल्लियों की मशहूर लड़ाई,
बंदर के जज बनने से पहले,
थोड़ी सी थी अक्ल लगाई ।
 
आखिर हम दोनों ही फल हैं,
बेशक अलग-अलग है जाति,
दूजे के हाथों गर खेलें,
निश्चित हार नजर है आती ।
 
ऐसे ही है देश हमारा,
अलग है भाषा, अलग धर्म है,
मिलजुल के सब रहना बच्चो,
देश के प्रति यही कर्म है ।
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