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वर्ष: 2, अंक 26, दिसम्बर(प्रथम), 2017



डॉ० रिक लिंडल द्वारा रचित अंग्रेजी पुस्तक 'The Purpose'
के हिंदी अनुवाद का अगला भाग
[.....पिछले अंक से] अध्याय 3
" प्रेम एवं सहवास"


लेखक: डॉ० रिक लिंडल
अनुवादक: डॉ० अनिल चड्डा


ब से रिक्की ने होलर फार्म पर अपनी गर्मियाँ बितानी शुरू की थी, उसके बाद कुछ वर्ष बीत गये थे, और वह मधुर सोलह वर्ष का हो गया था. उसका सामजिक जीवन क्रियाशील था; उसे अच्छी तरह से पसंद किया जाता था और उसके अनेक मित्र थे. उसके रोमानी आकर्षण थे, जैसे कि उसके मित्रों के थे. हालांकि, अपने दोस्तों से अलग जितनी भी रिक्की की प्रेमास्क्तियाँ थीं, वह दूसरे लड़कों के लिये थीं. वास्तव में, जब वह इसके बारे में सोचता था, जितने समय पहले का वह याद कर पाता था, वह कभी भी लैंगिक रूप से विपरीत लिंग की ओर आकर्षित नहीं हुआ था. उसने जवानी आने से पहले लड़कों और लड़कियों दोनों के साथ ही कई बार यौनाचार का परीक्षण किया था, लेकिन जवानी आने के बाद, यह गतिविधि पुरुषों पर केन्द्रित हो गई थी. उस समय, उसने यह तर्कसम्मत समझा कि उसकी यह प्राथमिकता उसकी इस चिंता के कारण होगी कोई कि लड़की गर्भवती हो सकती थी. परन्तु, उसको यह समझने में बहुत वर्ष लगे थे कि, वास्तव में, वह कभी भी यौन-सम्बन्ध की दृष्टि से लड़कियों की ओर आकृष्ट नहीं हुआ था. उसके इस आत्मरहस्योदघाटन ने रिक्की को हिला दिया, और इसे स्वीकार करना मुश्किल था. वह समझता था कि रूमानी ढंग से किसी दूसरे आदमी के लिये उसकी बेकरारी को उसके मित्रों के दाय्र्रे में “अच्छा” नहीं समझा जाता था.

इसलिये, इस कमी को पूरा करने के लिये रिक्की ने अपने कूछ आकर्षक साथियों के साथ कुश्ती करनी शुरू कर दी. इसने उसे अन्तरंग सम्पर्क का अवसर दिया, घास में लुढ़कना, और अपने मित्रों के गर्म और स्पन्दनशील शरीर को भिन्न मुद्राओं में नीचे डाल कर आनंद उठाना, जब वह अपने-आप को छुड़ाने के लिये मशक्कत करते थे. रिक्की के लिये, यह सामजिक तौर पर स्वीकृत सबसे नजदीकी शारीरिक सम्पर्क था जो दूसरे युवा आदमियों के साथ संभव था, और, जबकि उसके मित्रों के लिये यह केवल एक कुश्ती का मुकाबला था, रिक्की के लिये यह वर्जित आशिकाना अनुभव भी था. सोलह वर्ष की उम्र तक कुश्ती बहुत कम हो गई, अगरचे, हस्तमैथुन की निषेधित गतिविधि ने इसका स्थान ले लिया. यह कामोत्तेजक और आनन्दमयी समय था, लेकिन कोई प्रेम संबध नहीं था, क्योंकि उसके सभी मित्र हेटरोसेक्सुअल थे.

रिक्की कुछ लड़कियों से थोड़े-थोड़े समय के लिये मिला था, यह सोचते हुए कि यह एक सामाजिक दायित्व है, लेकिन उसने उनके लिये कभी भी तीव्र यौन इच्छा या यौन आकर्षण महसूस नहीं किया था. वह किन्ही और लड़कों को नहीं जानता था जो उसके जैसे ही हों, और जैसे-जैसे वर्ष गुजरते गये, वह सोचने लगा कि ग्रह पर वह ही एक था जो एक जैसे लिंग की ओर आकर्षित था. अपने बाद की किशोवस्था में एक गहन अलगाव की भावना उसके अंदर आने लगी. वह उस प्रेम के लिये अकेलापन महसूस कर रहा था जिसके बारे में उसने कभी नहीं जाना था. क्या उसे आदमी के द्वारा प्यार करने का अनुभव कभी प्राप्त होगा? अपने हेटरोसेक्सुअल मित्रों की भान्ति, जिनके प्रेम के किस्से खुले तौर पर स्वीकार किये जाते थे और उन पर लगातार चर्चा होती रहती थी, उसके रोमानी प्यार गोपनीय हो गये थे; इसलिये नहीं कि उसे चिढ़ाया जाता था या उसे बहिष्कृत कर दिया गया था, परन्तु क्योंकि वह किसी और ऐसे को नहीं जानता था जो समान रोमानी इच्छाएँ रखता था.

रिक्की को लगा कि वह इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था, इसके अलावा कि वह स्वयं को इसके अनुकूल बनाये और अपने इस पहलू को गुप्त रखे – और अपनी भावनाओं को छुपा कर रखे. परन्तु, उसके इस निर्णय ने उसके रोमानी प्यार की अभिव्यक्ति को दबा दिया था लेकिन इसने, जिससे वह भी अनभिज्ञ था, उसकी प्रेमभरे स्नेह को अनुभव करने की क्षमता को भी सामान्य रूप से कम कर दिया था. उसकी भावुकता कम हो गई थी. उसकी सक्षमता अपनी अन्तरंग भावनाओं को अनुभव करने में और अपनी अन्तरंग भावनाओं को अभिव्यक्त करने में कम हो गई थी, और दूसरों की पीड़ादायक भावनाओं के लिये भी कम सहानुभूतिपूर्वक हो गया था. वास्तव में, वह कठोर हो गया था; कठोर व्यक्ति के रूप में नहीं, अपितु एक तरीके से भावनाओं के मामले में जड़ हो जाना.

जैसे-जैसे उसने इसके बारे में सोचा, उसने निर्णय लिया कि अपने इस यौन झुकाव के मुद्दे पर अब उसे पुरानी आत्मा के विचार जानने अति-आवश्यक थे.

अगले वर्ष, सत्तरह वर्ष की उम्र में, रिक्की ने संकल्प किया कि वह पुरानी आत्मा से मिलने जाएगा. पिछली बार मिलने के बाद से पांच वर्ष गुजर गये थे, और उसके पास जीवन के बारे में बहुत से प्रश्न थे जिनका उत्तर जरूरी था. शहर में घर लौटने के बाद, स्कूल में नये वर्ष की तैयारी करते हुए, रिक्की ने उत्तर में अपने अंकल के फार्म, लक्जमोट, पर छोटी सी यात्रा करने का निर्णय लिया. यह अक्तूबर की शुरुआत थी और फार्म पर उत्तेजक समय था. सैकड़ो घोड़ों को, जो जिले के सभी फार्मों के थे, पहाड़ी मैदानों से घाटी में वापिस फार्मों की ओर हांका जा रहा था. फार्म में गतिविधियों की हलचल थी, लेकिन रिक्की को अपने घोड़े, ट्रस्ट, जिसकी उम्र बढ़ती जा रही थी, की सवारी करके पुरानी आत्मा से मिलने के लिये हीथर हिल्ल जाने का समय मिल गया. पहले की भांति, रिक्की चट्टान के ऊपर चढ़ा, और हीथर हिल्ल की तरफ मुंह करके सहज खड़ा होने से पहले गोलाकार चक्कर में चला – तीन बार घड़ी की सुईयों कि दिशा में और तीन बार विपरीत दिशा में – अपने घोड़े, ट्रस्ट, के बारे में प्रेम से सोचते हुए. समय ठहर गया था. हीथर हिल्ल खुली और पुरानी आत्मा ने दरवाजे पर आ कर अपने निजी अध्ययनकक्ष में ले जाने से पहले उसका स्नेहपूर्वक स्वागत किया, जैसा कि उसने उनकी पहली मुलाकात के दौरान किया था.

इस बार, रिक्की ने प्रश्नों की एक लम्बी सूची तैयार की थी, जिनमें जीवन और मृत्यु के बारे में और दुर्घटनाएं होने के कारण भी सम्मिलित थे, और उसके मित्रों की मृत्यु और होलर फार्म पर दो लड़कों की बीमारी, जिसने उन्हें दिमागी तौर पर विलम्बित और विक्षिप्त कर दिया था, के बारे में भी प्रश्न समिल्लित थे. उसकी दिलचस्पी इसको सुनने में थी कि पुरानी आत्मा को उसकी भाई की रूह के बारे में, जो अध्यात्मिक आयाम में बड़ा हो रहा था, क्या कहना था. सबसे अंत में लेकिन कम नहीं, वह अपने यौन झुकाव के बारे में सलाह लेना चाहता था.

ऐसा लगता था कि रिक्की जो प्रश्न पूछना चाह रहा था, पुरानी आत्मा उनके बारे में जानती थी और उसने कहा, “तुमने मेरे लिये बहुत से महत्वपूर्ण प्रश्न तैयार किये हैं, लेकिन इससे पहले कि मैं तुम्हे उनके उत्तर दे सकूँ मुझे तुम्हे तुम्हारे भौतिक संसार में अस्तित्व की प्रकृति के पृष्ठभूमि की कुछ जानकारी देनी होगी.”

रिक्की ने, यह याद करते हुए कि कैसे पिछली बार की मुलाक़ात में समय ठहर गया था, मजाक में कहा, “इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा, लगेगा क्या?”

पुरानी आत्मा ने मुस्कराते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की, “नहीं, इस क्षण में तुम समय के आयाम से बाहर हो, लेकिन मैं तुम्हे कुछ पलों में इसके बारे में और बताऊंगा...जैसा कि कहते हैं.”

रिक्की मुस्कराया और जितना अधिक सहज हो सकता था हो गया, उसी स्टूल पर बैठे हुए जिस पर वह उनकी पहली मुलाक़ात में बैठा था. जब उसने चारों और देखा, उसे सारे अध्यातिम्क ब्रहमांड का दृश्य दिखाई देता हुआ प्रतीत हो रहा था, इसके बावजूद कि वह पुरानी आत्मा के अध्ययनकक्ष के भीतर था. उसे यह थोड़ा विचित्र लगा कि वह पुरानी आत्मा के अध्ययनकक्ष में बैठा हुआ था, फिर भी सारे ब्रहमांड को देख पा रहा था, और यह सांस देने रोकने वाला था.

पहले की तरह, रंगीन गोलाकार रूहें इधर-उधर आ जा रहीं थी. रिक्की जानता था कि पुरानी आत्मा भी गोलाकार रूह थी, यद्दपि वह रिक्की को मनुष्य के रूप में दिख रही थी. लेकिन उसका कोई लिंग प्रतीत नहीं हो रहा था, जिसने रिक्की को परेशान कर दिया था. इसलिये इससे पहले कि वह वार्तालाप जारी रखें उसने पुरानी आत्मा से इसके बारे में पूछने के बारे में निर्णय किया.

रिक्की ने हिचकिचाते हुए पूछा, “मुझे क्षमा करें. मैं आशा करता हूँ कि इस बारे में पूछने से आप बुरा नहीं मानेंगें. आप मुनुष्य लगते हैं, लेकिन मैं इसका अनुमान नहीं लगा पा रहा कि आप पुरुष हैं या स्त्री.”

पुरानी आत्मा ने दबी हुई हँसी हँसते हुए उत्तर दिया, “मैं दोनों में कोई भी नहीं हूँ....लेकिन मैं दोनों में से कुछ भी हो सकता हूँ. लिंग का निर्धारण तभी होता है जब आत्मा ने धरती पर जीवनकाल का निर्णय लिया हो. भ्रूण के लिंग का निर्धारण गर्भावस्था में होता है. और, क्योंकि तुम्हे धरती पर जाति को पैदा करने और उस बनाये रखने के लिये दो लिंगों की आवश्यकता होती है, हम शरीर को या तो पुरुष बनाते हैं या स्त्री. लेकिन यहाँ आध्यात्मिक आयाम में, प्रजनन नहीं होता, इसलिये पुरुष या स्त्री होने की कोई आवश्यकता नहीं है.”

“ओह, ठीक है.”

“परन्तु, मैं जानता हूँ कि तुम्हे सलाह लेना तब आसान लगेगा जब तुम्हे मैं पुरुष आकृति के माध्यम से दूँगा, कृपया अपने आप को मेरे बारे में पुरुष के रूप में सोचने के लिये और सम्बोधित करने के लिये स्वतंत्र महसूस करो.”

“ठीक है, मैं करूंगा.”

पुरानी आत्मा ने सफेद वस्त्र पहने हुए थे और एक हल्का नीला प्रभामंडल उसके आसपास से निकलता प्रतीत हो रहा था. उसके गले में एक बड़ा पदक सुनहरी डोरी से लटक रहा था. पदक एक तरह का शीशा प्रतीत होता था, क्योंकि जब रिक्की उस पर देखने की चेष्टा करता था, तो ऐसा लगता था कि जैसे अब तक का उसका सारा जीवन उसी की ओर प्रतिबिम्बित हो रहा हो.

रिक्की ने टिप्पणी की, “तुम्हारे पास वह एक सुन्दर पदक है. जब मैं इसको देखता हूँ तो मुझे अब तक का अपना सारा जीवन दिखाई देता है.”

“हाँ, यहाँ रूहों के संसार में यह हममें से बहुतों के पास है. यह फिल्ग्जुर की भान्ति हमारे काम में सहायता करता है.”

जब रिक्की ने पुरानी आत्मा की ओर देखा, तो उसे एहसास हुआ कि, यद्दपि वह पुरानी आत्मा को एक बहुत वृद्ध आत्मा की भांति जानता था, वह ऐसे लग रही थी कि जैसे अपने जीवन के प्रारंभ में हो – उसके पिता, बल्दुर, से भी छोटी आयु का. पुरानी आत्मा के गहरे सुनहरे बाल थे, मोटी-मोटी भौंहे, और गहरी भूरी आँखें थीं.

जैसे ही उसने शान्ति से बोलना शुरू किया, पुरानी आत्मा से एक गहरी करुणा की भावना उभरी, “आओ अब हम अपने विषय पर लौटते हैं आज के अपने पाठ को प्रारंभ करते हैं.”

रिक्की ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लेने के लिये स्वयं को तैयार किया.

“तुम्हे एहसास नहीं है कि जो प्रश्न तुमने आज के लिये मेरे लिये तैयार किये हैं उनके उत्तर समझने के लिये तुम्हे कितनी जानकारी की आवश्यकता है.”

रिक्की ने, मुस्कराहट के साथ, कहा, “ठीक है, क्योंकि मैं समय के आयाम से बाहर हूँ, मेरे विचार से जो समय तुम्हे वर्णन करने में लगेगा वह कोई मुद्दा नहीं होगा.”

पुरानी आत्मा मुस्कराई, “इससे पहले कि मैं तुम्हारे प्रश्नों के कुछ उत्तर दूँ, मुझे तुम्हे कुछ अवधारणाओं के बारे में विस्तार से बताना होगा. पहले मैं तुम्हे थोड़ा सा यह बताऊंगा कि ब्रहमांड की रचना कैसे होती है, तुम इसमें अपनी वास्तविकता की रचना कैसे करते हो.”

“वह बहुत सारी जानकारी के समान लगता है.”

“हाँ, ऐसा ही है. लेकिन तुम्हारे प्रश्नों का सम्बन्ध जीवन के और मृत्यु के महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ है, और जब तक तुम्हे इन अवधारणाओं की मौलिक जानकारी नहीं होगी, तुम मेरे उत्तरों का कारण और तर्क नहीं समझ पाओगे.”

“अच्छा, मैं तैयार हूँ. आइये शुरू करते हैं. क्या आप यह सोचते हैं मेरे लिये यह समझना संभव है कि ब्रहमांड की रचना कैसे होती है?”

पुरानी आत्मा ने उत्तर दिया, “हाँ, सीमित रूप में.”

[क्रमशः........(अगले अंक में पढ़ें "ब्रह्माण्ड का विकास")]
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